वक्त

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ताकत – ए – रूहानी

शुक्रान शुक्रिया शुक्रगुज़ार हूँ
मैं अपने बेपरवाह उत्तों
हजारों हज़ार सलाम परवरदिगार नूं
पैदा हर शह जिसदी पनाह विच्चों
रोम रोम खिड़े बहारों बहार हूँ
खुदा उतरिया आप असमान तो
हर ताकत गावे गुलज़ार साज़ो
ताकत – ए – रूहानी ‘सतनाम’ संतों !!

ख़ुदा रमज़ पाक किसे हक़ ना आई,
ते शह शह रुषना गया रूहानी,
लफ्ज़ फिक्रमंद फिरे जाए ना गाथा गाई,
नूर फूटा जग ऊपर लासानी,
शाहों दा शाह फ़क़ीर मस्त दम दम ख्वाज्जो
ताकत – ए – रूहानी ‘सतनाम’ संतों !!

रहमान रहीम, अल-खबीर ख़ुदा,
लूँ-लूँ चमकता शुमार तेरा है,
बंदा-बख़्श गरीब-नवाज़ कोई कण ना तुझसे जुदा,
रूह-रूह दमकता बेपरवाही बसेरा है,
दम हक़दार-ए-मुक़ाम जो आप जाए नवाज़ों
ताकत – ए – रूहानी ‘सतनाम’ संतों !!

पाक़ ज़मीन जलालआने दी,
जहाँ चरण आन टिकाये तू,
धन पिता वरियाम महारुह,
सजदे माता आस कौर ममता नूं,
भवसागर पार उतारण काटी चौरासी लाखोँ
ताकत – ए – रूहानी ‘सतनाम’ संतों !!

मालिक-ऐ-आलम मस्तो मस्त मस्ताना पिता प्यारा,
सूरत बताई अनामी, सतनाम का दिया ईशारा,
पैड़ रब्ब की, चढ़ाये बन्दे को रूहानी राहोँ
ताकत – ए – रूहानी ‘सतनाम’ संतों !!

भूलों को राह बताये, सत्संग कर नाम दिया,
अरे! भटकते बाशिंदो, तीजी बॉडी में इसी ने जाम दिया,
हम थे, हम है, हम रहेंगे, ऐसा गुढ़ पैग़ाम दिया,
दूर करो हर शक़ को ख़ुद से, आप वरतदा खंडो-बरह्मंडो
ताकत – ए – रूहानी ‘सतनाम’ संतों !!
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खेर मोहब्ता दी सौग़ात

किते जियुंदै जाग्दे आशिक़ नचदे ने
किते क़ाफ़िरा दी महफ़िल च इश्क़ जचदे ने
कोई यारा दे दीदारां नूं पए भजदे ने
मैं फड़ थम्ब तेरे नाम दा, वे आयी दर नूं
खेर मोहब्ता दी सौग़ात दे, करदे जिन्ने बन्दे सजदे ने !!

कलमाँ नूं साह मिल जांदा सजना जी
चुक्क जेहड़े वेले कागज़ ते लिखना जी
एक नाम चंदरिये नूं तेरा ऐसा पै गया
झाती जिथे अखियां मारन, नूर ही दिसणा जी
वसदा नहीं जिहड़ी राह उत्ते, थां ओह कच्च दे ने
खेर मोहब्ता दी सौग़ात दे, करदे जिन्ने बन्दे सजदे ने !!

आई हां संगा दा गहिना सर चुक्क के वे
ना ख़ैर दीदार दी पावे जेकर, जाना ततड़ी ने मुक्क वे
पतझड़ छा जावे शहर ते, रोम रोम दा पत्ता जावे सुक्क वे
अंदर दा अंदर रह जावे, बस साहा दी धुक्क धुक्क वे
खेर मोहब्ता दी सौग़ात दे, करदे जिन्ने बन्दे सजदे ने !!

मुका सुटिया तेरियां बेपरवाहियाँ ने साहिबा मेरे
ना मसीत झुकी ना घंट बजाए, हथ माला तेरी फेरे
सूरज रोज़ चढ़े, हनेरा जिंद नूं रिहा घेरे
आजा वे आजा इश्क मुड़ आजा, गया नाजाने राह केहड़े
ठंडक दे भट्ट देहकदी नूं , बिन तेरे असी रहे मचदे वे
खेर मोहब्ता दी सौग़ात दे, करदे जिन्ने बन्दे सजदे ने !!

 

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अपना कोई नहीं

सुनेहरो पलों की दास्ताँ, कहने को ही रह गयी,
जिंदा थे जो कभी, वो ज़िंदगी सपनों में बह गयी,
हकीकत करते करते बहुत रिश्ते याद बन गए
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

जब मिलते हैं, सब मिलते हैं, हाथ मिलाकर खिलते है
कुछ गले मिले, कुछ गले पड़े, कुछ दूर खड़े ही जलते है
यह मंजर उन पलो का है, जब जेब नोटों से भरी भरी…
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

मैं प्यारा सबका हो गया हो गया, ओर दिल के मोह गया
जानें था मुझको जो नहीं, संग हंस पड़ा साथ ही रो गया
खास लगता सारे जग को अब, शोहरत सर पे चढ़ी रही
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

चमक मेरी थी, दमक मेरी थी, सबको आने मेरी थी
जो साथ चलते थे नहीं, सर उनके चढ़ी सनक मेरी थी
सत्यम शिवम् सुन्दरम जब हूँ, पताका नाम की फहरा रही
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

सम्मान भी मेरा, ज्ञान भी मेरा, लोगों को ध्यान भी मेरा
मुँह छुपाते फिरते जो, अब उनका घर मकान भी मेरा
खन खन सक्को के पग हूँ चलता, गरीबी साथ रही नहीं
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

लिया मोड़ वक़्त ने ऐसा, बना दिया मुझे पहले जैसा
ओर पता लगा मैं हूँ ही कब, बोलता था मेरे जेब का पैसा
जो साथ खड़े मरने को, वो बातें रह गयी धरी धरी
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

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‘चाहतों की सेज’

करुँ क्या हाथों से मन फिसला जाता है
खुद ही हँसे जा खुद शोक मनाता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

आँखों की पलके झलकती ही नहीं
तकती है रास्ता तेरा पिया जो रूठे
ना सांस है और जां भी निकलती ही नहीं
बिन तेरे खुदा जहान सब लगे झूठे
ओर कलाम दिल का इबादत करवाता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

फिर जाते जाते हर पल रुला सा गया
चुभन सनम की जुदाई तड़फाये
ले आंसुओं में चेहरा पीह का मन सुला सा गया
बंद अखियन से मिलन का सपना सजाये
टूटते नींद सब पिघल पिघल जाता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

यह करम है उनका या सितम यादों पे
ना आते, ना तरस कमाते है
शम्मा उनकी, पहरा उनका ही बातों पे
लुंह लुंह दासी का जलाते है
वो कोई भी बात दिल की कहां बताता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

दिल चाहता तुझे, बस पहचानता ही तुझे
इश्क़ को समझ बैठा खुदा है
मोहब्बत ने जब जकड़ा ही है मुझे
एक रोम भी तुमसे ना जुदा है
दिल मुक़्क़मल जो तेरे नाम से वक़्त बिताता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

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पराया देस

अब लगने लगा जैसे अनजान हो तुम
रहती आबादी के बाद भी सुनसान हो तुम
तेरी गोद में पल रहे पलों की चाह जवां थी कभी
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

कभी साँसे उखड जाती थी, जो दूर तुझसे रहना हो
हर लफ्ज़ फ़िज़ाओं को पुकारता था, ग़र दुःख कोई कहना हो
ना बनके रह सका तेरा, ना साथ तू निभा सका
मेरी आँखों में रह गए बस एक मेहमान हो तुम
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

ज़िंदगी की ढलती शाम को आँगन में तेरे गुज़ार जाता
जाते हुए मेरे कदमों को कहीं वापिस तू पुकार पाता
मेरे ही आंसू धो रहे, पड़ते मेरे निशानों को
ऐ बिछड़े हुए आँगन बस बिखरे हुए सामान हो तुम
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

नींव से सटा हुआ आशियाना अब भी वहां
लौटने की सोच पर फिर जाऊं ओर कहाँ
घुटन होती है फिर, रोम रोम सहम जाता है
लाख खुशियों के होने पे भी शमशान हो तुम
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

अंधा सा होता हूँ, गूंगा ही तो चलता हूँ
अनबोल ही घूमता हुआ, ठगा सा निकलता हूँ
तेरा पग पग चुभता है, छाँव पराई लगती है
बिछड़े हुए शहर मेरे, और कुछ नहीं अनजान हो तुम
तेरी गोद में पल रहे पलों की चाह जवां थी कभी
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम ||

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Peer-e-Hind

Happy Birthday Guru Gobing Singh sahib ji

350th Bithday of Sahib-e-kmaal Guru Gobind singh ji

shanejeetwordpress

Mein chla zamaane mein dhundhne, kis se zamaana ab chal nikla
Ro padta hai har rom mera, jb kurbaniyu bhra tera har pal nikla
dard uthataa hai dil ke andar jo daani mein tujhe bhulkar nikla
Tujhko sar jhukta sajde mein, aur jee deedar ko machal nikla

Sath liye har khud khuda ke bande, bheekhan shah peer jab aaya
Ardaas kri Kabul jagmata, Gujar maat sang nurani fakir mukh dikhlaya
Hinduan ka tu rama-kanha ho yaa momin ka hai yeh khudaya
Parkhan tej gobind rai ka, do matt ruhani hath mein pakdaya
Hum aaye sb bchaawan ko, smjhaan liye, dou matt chuwan karr nikla.
Tujhko sar jhukta sajde mein, aur jee deedar ko machal nikla

Hum khatir ubaran ke liye, har ktraa khoon ka desh ko diya
Gau-garib swaaran ko tune shastran ka roop dashmesh jo liya
baal-roop hai mastak noor-e-chandaa, baap jneyuu  bchawan tor diya
Oh Peer-e-Hind kya gunn kahu…

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मेरे पीहू

ना जीवत जाए ना मरणत होये
ऐसा दुःख दिया मेरे पीहू
उठत बैठत रग रग भोगु….
ऐसा हाल किया मेरे पीहू

तू दूर गयो, मोपे तरस ना करियो
रात घनी धणी काहे दीजो
अखियन नीर धार जाए बहती
कंठ लगा अपना नाही कीजो
रंग पिया थारे प्रेम का घणा
रोम रोम हुआ मेरे पीहू

बाबो म्हणे खरी सुणावे,
आंधो दिखे कोणी बावली
भरोटी ठाये बीच पड़ी जियु
ओढ़णों ओलो थीं पाज़ेब खड़काई साँवली
थेह सर चढ़ बोलिया मेरे पीहू

बोरला पहरिया, कंठी पहरिया
मोट्यार थेह नाम री तागड़ी पहरिया
नीमड़ो नीचे बैठ राह निहारु
घाघरो घाबा माटी माटी हो रिहा
हेली छोड़ बणीठणी बेठिया मेरे पीहू

आवजो पिया जी आवजो जल्दी
आपणी संगिनी साथ ले चालियो
जग की कोणी रब की कोणी
थारी मरजाणी बधावो गायो
बावजी मिलाया मेरे पीहू !!

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“मोती “

जिंदगी की राहों में चलते चलते
ना जाने कब नज़रों को शाम मिल जाए

भागती हुई दुनिया में, थकी हुई साँसों को
ना जाने कब विराम मिल’जाए

ख़ाक छानते हैं हम हर गली मोहल्ले की
ना जाने कब सनम सरेआम मिल जाए

बीताते हैं वक़्त हर मंदिर मज़ार पर
ना जाने कब मेरे दिल का भगवान मिल जाए

आँखों से बहते नीर पर, हो कदर तुम्हारी एकदफा जो
ना जाने कब इन्हें “मोती ” नाम मिल जाए !!!

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आशिक़

जा के मक्के पढ़ आयत अल्लाह मानावे तू
गंगा डुबकियां ला के नहा के आवे तू
गया जा भावे पंड पाठ पढ़ावे तू
राज़ी रज़ा च रहन ते इश्क़ वाला जाम पावे तू
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

बिरहा दी तड़फ अगन लगन बिना केहड़ा चन्न चढ़ाना है
वेखिया वजूद जिस अजब दा है नि ते कीनू रहे रिझाना है
ईद दी खुशियाँ केहडिया जे यार रूसिया ना मनाना है
नस नस कित्ते रोशन होव ताहि नूरी मुख अम्ब्री चढ़ जावे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

डाह के चरखा यादां वाला, इश्क़ दी तंद चढ़ाई जाँवी
मुखड़े दी इबादत करिये माहिए, तू जिंद जान साई
पाके हेक मारीं वाजा ले नाम रूमानी सजन दे दरसन ताई
कोल इश्क़ जी सद्दा देन जा आप चल सोहना नेड़े बह जावे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

इक मंग एहजी होव सच्चे रब्ब तो, खिच्च दीदार वाली गुढी भई
ना रमज़ दुनिया दी रहे ना चेता रहन्दा फिर किन्ना गलत ते सही
महबूब जिहा कौन दिस्दा है घूम घूम वेख ज़माना-ए -उजाड़ लवि
सुरूर तीखा सुर्ख लाल छा जाँदा एक यार दे ख्याला च समावे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

असुल एक इह इस कारोबार दा, देना ही देना सब सजना नूं
सह दर्द हज़ारा,चेता औसदा रखीं नारे, कित्ते कढ़ी ना हूँ
जागने रखने पैंदे ने आशिक़ी निभावन लई बाल के दिल धूं धूं
आखर मेल हो जावणा, चलदा चली ते काफ़िया गाई जांवे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

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