अपना कोई नहीं

सुनेहरो पलों की दास्ताँ, कहने को ही रह गयी,
जिंदा थे जो कभी, वो ज़िंदगी सपनों में बह गयी,
हकीकत करते करते बहुत रिश्ते याद बन गए
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

जब मिलते हैं, सब मिलते हैं, हाथ मिलाकर खिलते है
कुछ गले मिले, कुछ गले पड़े, कुछ दूर खड़े ही जलते है
यह मंजर उन पलो का है, जब जेब नोटों से भरी भरी…
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

मैं प्यारा सबका हो गया हो गया, ओर दिल के मोह गया
जानें था मुझको जो नहीं, संग हंस पड़ा साथ ही रो गया
खास लगता सारे जग को अब, शोहरत सर पे चढ़ी रही
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

चमक मेरी थी, दमक मेरी थी, सबको आने मेरी थी
जो साथ चलते थे नहीं, सर उनके चढ़ी सनक मेरी थी
सत्यम शिवम् सुन्दरम जब हूँ, पताका नाम की फहरा रही
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

सम्मान भी मेरा, ज्ञान भी मेरा, लोगों को ध्यान भी मेरा
मुँह छुपाते फिरते जो, अब उनका घर मकान भी मेरा
खन खन सक्को के पग हूँ चलता, गरीबी साथ रही नहीं
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

लिया मोड़ वक़्त ने ऐसा, बना दिया मुझे पहले जैसा
ओर पता लगा मैं हूँ ही कब, बोलता था मेरे जेब का पैसा
जो साथ खड़े मरने को, वो बातें रह गयी धरी धरी
मतलबों से जीने लगे हम ओर साथ ‘अपना कोई नहीं’!!

NEW POEM PIC

Advertisements

‘चाहतों की सेज’

करुँ क्या हाथों से मन फिसला जाता है
खुद ही हँसे जा खुद शोक मनाता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

आँखों की पलके झलकती ही नहीं
तकती है रास्ता तेरा पिया जो रूठे
ना सांस है और जां भी निकलती ही नहीं
बिन तेरे खुदा जहान सब लगे झूठे
ओर कलाम दिल का इबादत करवाता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

फिर जाते जाते हर पल रुला सा गया
चुभन सनम की जुदाई तड़फाये
ले आंसुओं में चेहरा पीह का मन सुला सा गया
बंद अखियन से मिलन का सपना सजाये
टूटते नींद सब पिघल पिघल जाता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

यह करम है उनका या सितम यादों पे
ना आते, ना तरस कमाते है
शम्मा उनकी, पहरा उनका ही बातों पे
लुंह लुंह दासी का जलाते है
वो कोई भी बात दिल की कहां बताता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

दिल चाहता तुझे, बस पहचानता ही तुझे
इश्क़ को समझ बैठा खुदा है
मोहब्बत ने जब जकड़ा ही है मुझे
एक रोम भी तुमसे ना जुदा है
दिल मुक़्क़मल जो तेरे नाम से वक़्त बिताता है
रात ही रात में जी चाहने को यह
दिन भर ‘चाहतों की सेज’ सजाता है !!

20170903_002957

पराया देस

अब लगने लगा जैसे अनजान हो तुम
रहती आबादी के बाद भी सुनसान हो तुम
तेरी गोद में पल रहे पलों की चाह जवां थी कभी
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

कभी साँसे उखड जाती थी, जो दूर तुझसे रहना हो
हर लफ्ज़ फ़िज़ाओं को पुकारता था, ग़र दुःख कोई कहना हो
ना बनके रह सका तेरा, ना साथ तू निभा सका
मेरी आँखों में रह गए बस एक मेहमान हो तुम
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

ज़िंदगी की ढलती शाम को आँगन में तेरे गुज़ार जाता
जाते हुए मेरे कदमों को कहीं वापिस तू पुकार पाता
मेरे ही आंसू धो रहे, पड़ते मेरे निशानों को
ऐ बिछड़े हुए आँगन बस बिखरे हुए सामान हो तुम
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

नींव से सटा हुआ आशियाना अब भी वहां
लौटने की सोच पर फिर जाऊं ओर कहाँ
घुटन होती है फिर, रोम रोम सहम जाता है
लाख खुशियों के होने पे भी शमशान हो तुम
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम

अंधा सा होता हूँ, गूंगा ही तो चलता हूँ
अनबोल ही घूमता हुआ, ठगा सा निकलता हूँ
तेरा पग पग चुभता है, छाँव पराई लगती है
बिछड़े हुए शहर मेरे, और कुछ नहीं अनजान हो तुम
तेरी गोद में पल रहे पलों की चाह जवां थी कभी
ज़माने बाद सिर्फ ‘ पराया देस’ नाम हो तुम ||

517372-black-and-white-night-rain-street

Peer-e-Hind

Happy Birthday Guru Gobing Singh sahib ji

350th Bithday of Sahib-e-kmaal Guru Gobind singh ji

shanejeetwordpress

Mein chla zamaane mein dhundhne, kis se zamaana ab chal nikla
Ro padta hai har rom mera, jb kurbaniyu bhra tera har pal nikla
dard uthataa hai dil ke andar jo daani mein tujhe bhulkar nikla
Tujhko sar jhukta sajde mein, aur jee deedar ko machal nikla

Sath liye har khud khuda ke bande, bheekhan shah peer jab aaya
Ardaas kri Kabul jagmata, Gujar maat sang nurani fakir mukh dikhlaya
Hinduan ka tu rama-kanha ho yaa momin ka hai yeh khudaya
Parkhan tej gobind rai ka, do matt ruhani hath mein pakdaya
Hum aaye sb bchaawan ko, smjhaan liye, dou matt chuwan karr nikla.
Tujhko sar jhukta sajde mein, aur jee deedar ko machal nikla

Hum khatir ubaran ke liye, har ktraa khoon ka desh ko diya
Gau-garib swaaran ko tune shastran ka roop dashmesh jo liya
baal-roop hai mastak noor-e-chandaa, baap jneyuu  bchawan tor diya
Oh Peer-e-Hind kya gunn kahu…

View original post 251 more words

मेरे पीहू

ना जीवत जाए ना मरणत होये
ऐसा दुःख दिया मेरे पीहू
उठत बैठत रग रग भोगु….
ऐसा हाल किया मेरे पीहू

तू दूर गयो, मोपे तरस ना करियो
रात घनी धणी काहे दीजो
अखियन नीर धार जाए बहती
कंठ लगा अपना नाही कीजो
रंग पिया थारे प्रेम का घणा
रोम रोम हुआ मेरे पीहू

बाबो म्हणे खरी सुणावे,
आंधो दिखे कोणी बावली
भरोटी ठाये बीच पड़ी जियु
ओढ़णों ओलो थीं पाज़ेब खड़काई साँवली
थेह सर चढ़ बोलिया मेरे पीहू

बोरला पहरिया, कंठी पहरिया
मोट्यार थेह नाम री तागड़ी पहरिया
नीमड़ो नीचे बैठ राह निहारु
घाघरो घाबा माटी माटी हो रिहा
हेली छोड़ बणीठणी बेठिया मेरे पीहू

आवजो पिया जी आवजो जल्दी
आपणी संगिनी साथ ले चालियो
जग की कोणी रब की कोणी
थारी मरजाणी बधावो गायो
बावजी मिलाया मेरे पीहू !!

d99b6275bb2af222493acb50d2c421e1

“मोती “

जिंदगी की राहों में चलते चलते
ना जाने कब नज़रों को शाम मिल जाए

भागती हुई दुनिया में, थकी हुई साँसों को
ना जाने कब विराम मिल’जाए

ख़ाक छानते हैं हम हर गली मोहल्ले की
ना जाने कब सनम सरेआम मिल जाए

बीताते हैं वक़्त हर मंदिर मज़ार पर
ना जाने कब मेरे दिल का भगवान मिल जाए

आँखों से बहते नीर पर, हो कदर तुम्हारी एकदफा जो
ना जाने कब इन्हें “मोती ” नाम मिल जाए !!!

tears

आशिक़

जा के मक्के पढ़ आयत अल्लाह मानावे तू
गंगा डुबकियां ला के नहा के आवे तू
गया जा भावे पंड पाठ पढ़ावे तू
राज़ी रज़ा च रहन ते इश्क़ वाला जाम पावे तू
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

बिरहा दी तड़फ अगन लगन बिना केहड़ा चन्न चढ़ाना है
वेखिया वजूद जिस अजब दा है नि ते कीनू रहे रिझाना है
ईद दी खुशियाँ केहडिया जे यार रूसिया ना मनाना है
नस नस कित्ते रोशन होव ताहि नूरी मुख अम्ब्री चढ़ जावे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

डाह के चरखा यादां वाला, इश्क़ दी तंद चढ़ाई जाँवी
मुखड़े दी इबादत करिये माहिए, तू जिंद जान साई
पाके हेक मारीं वाजा ले नाम रूमानी सजन दे दरसन ताई
कोल इश्क़ जी सद्दा देन जा आप चल सोहना नेड़े बह जावे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

इक मंग एहजी होव सच्चे रब्ब तो, खिच्च दीदार वाली गुढी भई
ना रमज़ दुनिया दी रहे ना चेता रहन्दा फिर किन्ना गलत ते सही
महबूब जिहा कौन दिस्दा है घूम घूम वेख ज़माना-ए -उजाड़ लवि
सुरूर तीखा सुर्ख लाल छा जाँदा एक यार दे ख्याला च समावे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

असुल एक इह इस कारोबार दा, देना ही देना सब सजना नूं
सह दर्द हज़ारा,चेता औसदा रखीं नारे, कित्ते कढ़ी ना हूँ
जागने रखने पैंदे ने आशिक़ी निभावन लई बाल के दिल धूं धूं
आखर मेल हो जावणा, चलदा चली ते काफ़िया गाई जांवे
यार सजन, नाल चले सदा कित्ते आशिक़ कहलावे !!

o-aashiq-e-rasool-do-you-have-no-shame.jpg

चौथा मानवता सेवा कार्य !!

“मानव- इंसानियत ही पूजा है”

पूरा अवश्य पढ़े !!

जय भारत

प्यारे दोस्तों,

चौथा मानवता सेवा कार्य करने की राह पर, आप सबका साथ सराहनीय होगा।

आप सबके साथ के लिए बहुत शुक्रिया और सलाम सबके जज़्बे को, हम सब इस पावन धरती भारत के वंशज है। किसी को सब कुछ मिला है तो किसी को थोड़ा कम और हमे ईश्वर ने इस लायक बनाया है की हम अपने ही भाई बहनों के लिए कुछ कर सकते है तो आगे आकर अपना असली धर्म निभाना चाहिए।

इसी शुभ भावना के साथ हम इस बार आप सबके सहयोग से तीसरी बार छोटे नन्हे प्यारे बच्चों के लिए कापियों का इंतज़ाम कर रहे हैं। इस बार स्कूल सेक्टर 14 गुडगाँव में है।
स्कूल प्रशासन से मीटिंग हो चुकी है जिसमे जानकारी मिली है की 300 ज़रूरतमंद बच्चों के लिए हिंदी लाइन वाली कापियों का इंतज़ाम करना होगा। हर बच्चे को 5 कापियों की ज़रूरत है तो इस हिसाब से 1500 कापियां हमे करनी है।

आप सब एक बार फिर आगे आए और अपनी सहूलियत के हिसाब से अपना सहयोग दे।

आप चाहे तो राशि दे कर या अपने हिसाब से कापियां खरीद कर हम तक पहुंचा सकते है।

आप अगर चाहें तो इस मानवता के कार्य में मेरा साथ दे सकते है, अपना योगदान देने के लिए आप मुझसे यहाँ इनबॉक्स में या फिर मेरे मोबाइल नंबर (9911257824 ) पर वाट्सअप कर सकते है। आप कम से कम कितनी भी राशि का योगदान दे सकते है।

इस मानवता के कार्य में राशि की कोई मांग नहीं है जी। 10 रूपये से लेकर कितना भी आप दे सकते है।

ख़ुशी होगी अगर कोई भी साथ चलकर उन बच्चों को अपने हाथ से हमारे साथ सामान वितरित करना चाहेगा।

तीसरा मानवता सेवा कार्य
1 . गोवेर्मेंट स्कूल सेक्टर 14 सामने हाउस नंबर 622 (मेंन मार्किट के पीछे )
2 . 6th, 7th और 8th क्लास के बच्चों के लिए
3 . हिंदी लाइन वाली कापियां चाहिए
4 . कुल 1500 कापियां का इंतज़ाम
5 . हर विद्यार्थी को 5 कापियां दी जानी है

समय तथा तारीख : 15 जुलाई 2016 , प्रातः 9 से 11

आप खुद भी राशि के बजाए कापियां खरीद सीधा स्कूल में पहुँच सकते हैं।

आओ मानव होना साबित करें, हाथ से हाथ मिलाएं, किसी की मुस्कराहट का कारण बने।

दुनिया नहीं बदल सकते पर किसी की दुनिया के बदलने का कारण बन सकते है।

आप सबके साथ और जज़्बे के लिए फिर से दिल से शुक्रिया।

जय माँ भारती

“मानव- इंसानियत ही पूजा है”

कृष्ण्दासी

रंग उड़े तो ना थे, कहीं लिखा तो ना था
ना दिया तुमने जो जीवन उस से छीन ही लिया
केश भी झड़े तो ना थे, उस्तरा चला क्यों दिया था
जो कृष्ण्दासी ही कहाए, हवसी ने फिर भी छू ही लिया !!

माला देकर कर में, और पाठ पढ़ाया
जो भी तू देखे सब कुछ ही पराया
और दे दी धमकी ग़र कुछ भी रंगाया
यह सांसे उसकी, धरा उसी पे काला साया
सब तोड़ के नियम,रात अंधेर में नोच रूह ही लिया
जो कृष्ण्दासी ही कहाए, हवसी ने फिर भी छू ही लिया !!

नाथ तेरा हो गया परदेसी
जचती नहीं तुझे साजो-भेशी
ऐसे सब रोक लगाए
करनी सुंदरता की भी अनदेखी
भगवन ही अब तेरा हतैषी
आँख रख के लाल उसपे हाथों को अपने धो ही लिया
जो कृष्ण्दासी ही कहाए, हवसी ने फिर भी छू ही लिया !!

नज़र खोटी का कहर भी बरसे
दर्द मिटने को तब लगते अरसे
जात-बिरादरी सभी ने त्यागा
मदद पाने को दिल भी तरसे
भगवा ओढ़ा कर पावन कहे, पर अंश उसी में बो ही दिया
जो कृष्ण्दासी ही कहाए, हवसी ने फिर भी छू ही लिया !!

लूट कर रोज़ सब सहती
सह के कुछ न कहती
ग़र आवाज़ हल्क से निकल पड़े
तो मार खाकर फिर सहती है
कालिख नज़र जो आन पड़े, तो रिहाइश से निकाला हो ही लिया
जो कृष्ण्दासी ही कहाए, हवसी ने फिर भी छू ही लिया !!

हंसी में कितना दर्द छिपा
पलकों तले जिसे दबा ही लिया
जो निकल गया एक आंसू का भी
ले सौदा सुबह ही हो लेना
ढूंढ़ कर खरीदार तेरा , कारोबार कर यों ही लिया
जो कृष्ण्दासी ही कहाए, हवसी ने फिर भी छू ही लिया !!

टूट गई जिसकी डोरी
ना जाने नवजीवन पा वो गया
पता नहीं क्युँ ओढ़ा सफ़ेद चादर
जीते जी समाज तुझे मार रहा
ना खुदा सुने ना बन्दा सुने, तुझसे हमने मुंह मोड़ ही लिया
जो कृष्ण्दासी ही कहाए, हवसी ने फिर भी छू ही लिया !!

लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है
जुठ दे बाज़ार विच नाकामियां मशहूर है
किंनिया वि ठोकरां मथे वज्ज जावे
होना नहीं कदे वि उदासियां तो मजबूर है !!

अपनी राहां विच प्यार वाला बूटा लावी
किसे दे कहे ते सच्च तो ना हट्ट जाँवी
तेरियां मेहनता ते आउना चमकदा बुर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

पहाड़ां नूं रोंद के ही नदियाँ वेहन्दिया
तोड़दियां पथ्थरां नूं, ऊपर-थल्ले खेन्दिया
डुब्ब के असल विच समन्द्रां दा ही नूर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

गैरतां वि रखनिया नाले निमाणा होके तू रह
मीठा ज़ुबानों घोल, कुफर नाल जाँवी खह
शिखरां तांई उड़दे परिंदे, जिहनु अनख दा सुरूर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

मंज़िला धुँधलिया कल्ली तेरी ही नज़र तों
नेड़े आ जावन कित्ते चुके वधदे रहन दी सों
मात खा जांदे जेह्ड़े रखदे भेड़ा कोई गुरूर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

हनेरियां वि आउन गियां, भांबड वि मचन्गे
रोक लाऊंन वाले तेरी शह उत्ते नचन्गे
डरीं ना दर्दां तों जो फूटना एहना नासूर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

खुदा दे आशिक़, सबना च वेखदे काबा जी
इंज तेरा वि टिकाना मंजिल, सहना कोई दाबा की
कामयाबी खुदा हो तेरा, ते ओहदा तू मनसूर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

किन्ने ही चिखदे सी, अख्ख मछ दी तांवि चीरती
अर्जुन पांडव निशाना लाके कमाई वीरा वाली कीर्ति
सुनके ताने टूटी ना, जा उत्ते होणा तू ही मशहूर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….

हो की गया जेकर डिग्ग तू जांवे
उठ झाड़ दर्द अपने, नां लवेंगा कमावे
छड्ड सब बीतीयाँ बस जानी वधन दा दस्तूर है
लम्मे लम्मे राह ते कामयाबियां दूर है….